श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस  »  लहर 1: विभाव (आनंदवर्धक अवस्थाएँ)  »  श्लोक 275
 
 
श्लोक  2.1.275 
ते साधकाश् च सिद्धाश् च द्वि-विधाः परिकीर्तिताः ॥२.१.२७५॥
 
 
अनुवाद
"भक्त दो प्रकार के कहे गए हैं: साधक और सिद्ध।"
 
"The devotees are said to be of two kinds: the seeker and the accomplished."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)