श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस  »  लहर 1: विभाव (आनंदवर्धक अवस्थाएँ)  »  श्लोक 269
 
 
श्लोक  2.1.269 
औदार्यम् —
आत्माद्य्-अर्पण-कारित्वम् औदार्यम् इति कीर्त्यते ॥२.१.२६९॥
 
 
अनुवाद
“उदारता को दूसरे व्यक्ति को अपनी आत्मा तक देने की इच्छा के रूप में महिमा दी जाती है।”
 
“Generosity is glorified as the willingness to give even one’s soul to another person.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)