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श्लोक 267
श्लोक
2.1.267
ललितम् —
शृङ्गार-प्रचुरा चेष्टा यत्र तं ललितं विदुः ॥२.१.२६७॥
अनुवाद
"जहाँ स्पष्ट वैवाहिक प्रकृति की गतिविधियाँ होती हैं उसे ललिता, कामुकता के रूप में जाना जाता है।"
"Where there are activities of a clearly marital nature it is known as Lalita, sensuality."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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