श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस  »  लहर 1: विभाव (आनंदवर्धक अवस्थाएँ)  »  श्लोक 265
 
 
श्लोक  2.1.265 
यद्वा —
तेजो बुधैर् अवज्ञादेर् असहिष्णुत्वम् उच्यते ॥२.१.२६५॥
 
 
अनुवाद
“तेजस की एक और परिभाषा है अपराध के प्रति असहिष्णुता (चूंकि तेजस का एक और अर्थ अधीरता और उग्र विरोध है)।”
 
“Another definition of Tejas is intolerance towards offense (since another meaning of Tejas is impatience and fierce opposition).”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)