श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस  »  लहर 1: विभाव (आनंदवर्धक अवस्थाएँ)  »  श्लोक 263
 
 
श्लोक  2.1.263 
तेजः —
सर्व-चित्तावगाहित्वं तेजः सद्भिर् उदीर्यते ॥२.१.२६३॥
 
 
अनुवाद
“बुद्धिमान लोग कहते हैं कि सभी के हृदय में प्रवेश करने की क्षमता को प्रभाव [तेजस] कहा जाता है।”
 
“Wise men say that the ability to enter into everyone's heart is called influence [tejas].”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)