श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस  »  लहर 1: विभाव (आनंदवर्धक अवस्थाएँ)  »  श्लोक 259
 
 
श्लोक  2.1.259 
माङ्गल्यम् —
माङ्गल्यं जगताम् एव विश्वासास्पदता मता ॥२.१.२५९॥
 
 
अनुवाद
“सम्पूर्ण विश्व के लिए श्रद्धा का विषय होना ही मंगलमय होना कहलाता है।”
 
“To be an object of reverence for the entire world is called being auspicious.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)