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श्लोक 255
श्लोक
2.1.255
विलासः —
वृषभस्येव गम्भीरा गतिर् धीरं च वीक्षणम् ।
स-स्मितं च वचो यत्र स विलास इतीर्यते ॥२.१.२५५॥
अनुवाद
"जहाँ भारी चाल, बैल के समान स्थिर दृष्टि और हँसी के शब्द हों, उसे विलास कहते हैं।"
"Where there is a heavy gait, a steady gaze like that of a bull, and laughing words, that is called luxury."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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