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श्री भक्ति रसामृत सिंधु
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श्लोक 235
श्लोक
2.1.235
युधिष्ठिरादिको धीरैर् धीर-शान्तः प्रकीर्तितः ॥२.१.२३५॥
अनुवाद
“विद्वान लोग युधिष्ठिर तथा अन्य लोगों को धीर-शांत कहकर महिमामंडित करते हैं।”
“The learned glorify Yudhishthira and others by calling them patient and calm.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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