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श्लोक 232
श्लोक
2.1.232
गोविन्दे प्रकटं धीर-ललितत्वं प्रदर्श्यते ।
उदाहरन्ति नाट्य-ज्ञाः प्रायो’त्र मकर-ध्वजम् ॥२.१.२३२॥
अनुवाद
"धीर-ललिता के गुण कृष्ण में स्पष्ट रूप से प्रकट होते हैं। लेकिन नाट्यशास्त्र के विद्वान कामदेव का उदाहरण देते हैं।"
"The qualities of Dhira-Lalita are clearly manifest in Krishna. But the scholars of Natyashastra give the example of Kamadeva."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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