श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस  »  लहर 1: विभाव (आनंदवर्धक अवस्थाएँ)  »  श्लोक 229
 
 
श्लोक  2.1.229 
इदं हि धीरोदात्तत्वं पूर्वैः प्रोक्तं रघूद्वहे ।
तत्-तद्-भक्तानुसारेण तथा कृष्णे विलोक्यते ॥२.१.२२९॥
 
 
अनुवाद
"पूर्व विद्वानों ने रामचन्द्र में धीरोदात्त गुणों का वर्णन किया है। यही गुण कृष्ण में भी उनके भक्तों के प्रेम के अनुसार देखे जाते हैं।"
 
"The ancient scholars have described the noble qualities of Ramachandra. These same qualities are also seen in Krishna according to the love of his devotees."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)