श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस  »  लहर 1: विभाव (आनंदवर्धक अवस्थाएँ)  »  श्लोक 228
 
 
श्लोक  2.1.228 
गम्भीरत्वादि-सामान्य-गुणा यद् इह कीर्तिताः ।
तद् एतेषु तद्-आधिक्य-प्रतिपादन-हेतवे ॥२.१.२२८॥
 
 
अनुवाद
“कृष्ण के विशेष गुणों की सूची में सभी गुणों को अन्य गुणों की तुलना में इन चार प्रकारों में अधिक प्रमुखता से प्रकट होते हुए समझना चाहिए, यद्यपि अन्य गुण भी मौजूद हैं।”
 
“All the qualities in the list of Krishna's special qualities should be understood as manifesting more prominently in these four types than in other qualities, although other qualities are also present.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)