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श्लोक 2.1.223  |
कृष्णस्य पूर्णतमता व्यक्ताभूद् गोकुलान्तरे ।
पूर्णता पूर्णतरता द्वारका-मथुरादिषु ॥२.१.२२३॥ |
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| अनुवाद |
| "कृष्ण गोकुल में परम सिद्ध रूप में प्रकट होते हैं। मथुरा, द्वारका तथा अन्य स्थानों में वे और भी अधिक सिद्ध और परिपूर्ण रूप में प्रकट होते हैं।" |
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| "Krishna appears in Gokul in the most perfect form. In Mathura, Dwaraka and other places He appears in an even more perfect and complete form." |
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