अथासाधरण-गुण-चतुष्के —
(६१) लीला-माधुर्यं —
यथा बृहद्-वामने —
सन्ति यद्यपि मे प्राज्या लीलास् तास् ता मनोहराः ।
न हि जाने स्मृते रासे मनो मे कीदृशं भवेत् ॥२.१.२०९॥
अनुवाद
अब कृष्ण के चार असाधारण गुणों का वर्णन किया गया है: कृष्ण की लीलाओं की मधुरता, बृहद-वामन पुराण से: "यद्यपि मेरी सभी लीलाएँ बहुत आकर्षक और गहन हैं, किन्तु जब मैं अपनी रास-लीला का स्मरण करता हूँ, तो मैं यह नहीं बता सकता कि मेरे मन में क्या घटित होता है।"
Now four extraordinary qualities of Krishna are described: The sweetness of Krishna's pastimes, from the Brihad-Vamana Purana: "Although all My pastimes are very attractive and profound, yet when I remember My Rasa-Lila, I cannot describe what happens in My mind."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥