श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस  »  लहर 1: विभाव (आनंदवर्धक अवस्थाएँ)  »  श्लोक 202
 
 
श्लोक  2.1.202 
(५८) अवतारावली-बीजम् —
अवतारावली-बीजम् अवतारी निगद्यते ॥२.१.२०२॥॥
 
 
अनुवाद
(58) अवतारावली-बीजम्: सभी अवतारों का बीज - "जो सभी अवतारों का स्रोत है, उसे सभी अवतारों का बीज कहा जाता है।"
 
(58) Avatāravāli-bījam: The seed of all incarnations – “He who is the source of all incarnations is called the seed of all incarnations.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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