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श्लोक 2.1.199  |
(५७) कोटि-ब्रह्माण्ड-विग्रहः: हविन्ग् अ fओर्म् ओf तेन् मिल्लिओन् उनिवेर्सेस् —
अगण्य-जगद्-अण्डाढ्यः कोटि-ब्रह्माण्ड-विग्रहः ।
इति श्री-विग्रहस्यास्य विभुत्वम् अनुकीर्तितम् ॥२.१.१९९॥॥ |
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| अनुवाद |
| "जिसका स्वरूप अनंत ब्रह्माण्डों से युक्त है, उसे 'करोड़ ब्रह्माण्डों का रूप' कहा जाता है। इस प्रकार उसके स्वरूप की महानता का गुणगान होता है।" |
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| "He whose form consists of infinite universes is called 'the form of millions of universes'. Thus the greatness of his form is praised." |
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