श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस  »  लहर 1: विभाव (आनंदवर्धक अवस्थाएँ)  »  श्लोक 190
 
 
श्लोक  2.1.190 
अतः श्री-वैष्णवैः सर्व-श्रुति-स्मृति-निदर्शनैः ।
तद् ब्रह्म श्री-भगवतो विभूतिर् इति कीर्त्यते ॥२.१.१९०॥
 
 
अनुवाद
“इस प्रकार श्री वैष्णव, जिन्होंने श्रुति और स्मृति के सभी कथनों को ध्यान में रखा है, कहते हैं कि यह ब्रह्म भगवान की विभूति है।”
 
“Thus Sri Vaishnavas, who have taken into consideration all the statements of Shruti and Smriti, say that this Brahma is the glory of God.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)