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श्री भक्ति रसामृत सिंधु
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सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस
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श्लोक 19
श्लोक
2.1.19
अथ स्वरूपम् —
आवृतं प्रकटं चेति स्वरूपं कथितं द्विधा ॥२.१.१९॥
अनुवाद
अब आलंबन के रूप में स्वरूप की चर्चा की गई है: स्वरूप दो रूप लेता है: ढका हुआ और प्रकट।"
Now the form as the support is discussed: the form takes two forms: the covered and the revealed."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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