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श्री भक्ति रसामृत सिंधु
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लहर 1: विभाव (आनंदवर्धक अवस्थाएँ)
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श्लोक 174
श्लोक
2.1.174
(४९) वरीयान् —
सर्वेषाम् अति-मुख्यो यः स वरीयान् इतीर्यते ॥२.१.१७४॥॥
अनुवाद
(49) वरीयान: श्रेष्ठ - “जो सब लोगों में प्रधान है, उसे श्रेष्ठ कहा जाता है।”
(49) Variyan: Shrestha – “He who is the chief among all people is called the best.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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