श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस  »  लहर 1: विभाव (आनंदवर्धक अवस्थाएँ)  »  श्लोक 171
 
 
श्लोक  2.1.171 
(४८) समृद्धिमान् —
महा-सम्पत्ति-युक्तो यो भवेद् एष समृद्धिमान् ॥२.१.१७१॥॥
 
 
अनुवाद
(48) समृद्धिमान: समृद्ध - "जिसके पास महान खजाना है, उसे समृद्ध कहा जाता है।"
 
(48) Samriddhiman: Prosperous – “One who has great treasure is called prosperous.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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