श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस  »  लहर 1: विभाव (आनंदवर्धक अवस्थाएँ)  »  श्लोक 166
 
 
श्लोक  2.1.166 
(४६) नारी-गण-मनो-हारी —
नारी-गण-मनो-हारी सुन्दरी-वृन्द-मोहनः ॥२.१.१६६॥॥
 
 
अनुवाद
(46) नारी-गण-मनो-हरि: स्त्रियों के लिए आकर्षक - "जो व्यक्ति अपने स्वभाव से ही स्त्रियों के समूह को मोहित कर लेता है, उसे स्त्रियों का आकर्षक कहा जाता है।"
 
(46) Nari-gana-mano-hari: Attractive to women - "A person who by his very nature captivates a group of women is called attractive to women."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)