श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस  »  लहर 1: विभाव (आनंदवर्धक अवस्थाएँ)  »  श्लोक 165
 
 
श्लोक  2.1.165 
यथा —
पुरुषोत्तम चेद् अवातरिष्यद्
भुवने’स्मिन् न भवान् भुवः शिवाय ।
विकटासुर-मण्डलान् न जाने
सुजनानां बत का दशाभविष्यत् ॥२.१.१६५॥
 
 
अनुवाद
हे परम पुरुष! यदि आप इस पृथ्वी पर कल्याण करने के लिए प्रकट न होते, तो मैं नहीं जानता कि समस्त भयंकर राक्षसों द्वारा सताए जाने से भक्तों की क्या दशा होती।
 
O Supreme Being, if You had not appeared on this earth to do good, I do not know what would have happened to the devotees, tormented by all the fierce demons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)