श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस  »  लहर 1: विभाव (आनंदवर्धक अवस्थाएँ)  »  श्लोक 158
 
 
श्लोक  2.1.158 
(४३) कीर्तिमान् —
साद्गुण्यैर् निर्मलैः ख्यातः कीर्तिमान् इति कीर्त्यते ॥२.१.१५८॥॥
 
 
अनुवाद
(43) कीर्तिमान: विख्यात - "जो व्यक्ति निष्कलंक अच्छे गुणों के लिए प्रसिद्ध है, उसे विख्यात कहा जाता है।"
 
(43) Kirtimāṇa: Vikhyat - "A person who is famous for unblemished good qualities is called Vikhyat."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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