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श्लोक 156
श्लोक
2.1.156
(४२) प्रतापी —
प्रतापी पौरुषोद्भूत-शत्रु-तापि प्रसिद्धि-भाक् ॥२.१.१५६॥॥
अनुवाद
(42) प्रतापी: तेजस्वी - "जो आश्चर्यजनक पराक्रम से शत्रु को पीड़ा पहुँचाने के लिए प्रसिद्ध है, उसे तेजस्वी (तेजस्वी व्यक्ति) कहा जाता है।"
(42) Pratapi: Tejasvi - "One who is famous for causing pain to the enemy with amazing prowess is called Tejasvi (a brilliant person)."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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