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श्लोक 2.1.154  |
(४१) सर्व-शुभङ्करः —
सर्वेषां हित-कारी यः स स्यात् सर्व-शुभङ्करः ॥२.१.१५४॥॥ |
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| अनुवाद |
| (41) सर्व-शुभंकर: सबका उपकारक - "जो सबके हित के लिए कार्य करता है, वह सबका उपकारक कहलाता है।" |
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| (41) Sarva-shubhāṇkara: Benefactor of all – “He who works for the benefit of all is called the benefactor of all.” |
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