श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस  »  लहर 1: विभाव (आनंदवर्धक अवस्थाएँ)  »  श्लोक 154
 
 
श्लोक  2.1.154 
(४१) सर्व-शुभङ्करः —
सर्वेषां हित-कारी यः स स्यात् सर्व-शुभङ्करः ॥२.१.१५४॥॥
 
 
अनुवाद
(41) सर्व-शुभंकर: सबका उपकारक - "जो सबके हित के लिए कार्य करता है, वह सबका उपकारक कहलाता है।"
 
(41) Sarva-shubhāṇkara: Benefactor of all – “He who works for the benefit of all is called the benefactor of all.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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