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श्री भक्ति रसामृत सिंधु
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श्लोक 135
श्लोक
2.1.135
(३३) मान्यमान-कृत् —
गुरु-ब्राह्मण-वृद्धादि-पूजको मान्यमान-कृत् ॥२.१.१३५॥॥
अनुवाद
(33) मान्यमान-कृत्: आदरणीय - “जो व्यक्ति गुरु, ब्राह्मण और वृद्धों की पूजा करता है, वह आदरणीय कहलाता है।”
(33) Manyaman-krit: Respectable – “The person who worships Guru, Brahmin and elders is called respectable.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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