श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस  »  लहर 1: विभाव (आनंदवर्धक अवस्थाएँ)  »  श्लोक 132
 
 
श्लोक  2.1.132 
(३२) करुणः —
पर-दुःखासहो यस् तु करुणः स निगद्यते ॥२.१.१३२॥॥
 
 
अनुवाद
(32) करुणाः: दयालु - "जो व्यक्ति दूसरों का दुःख सहन नहीं कर सकता, उसे दयालु कहा जाता है।"
 
(32) Karunaah: Merciful – “A person who cannot bear the suffering of others is called merciful.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)