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श्री भक्ति रसामृत सिंधु
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सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस
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लहर 1: विभाव (आनंदवर्धक अवस्थाएँ)
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श्लोक 129
श्लोक
2.1.129
(३१) शूरः —
उत्साही युधि शूरो’स्त्र-प्रयोगे च विचक्षणः ॥२.१.१२९॥॥
अनुवाद
(31) शूरः: नायक - "नायक वह व्यक्ति है जो युद्ध में ऊर्जावान और शस्त्र चलाने में कुशल होता है।"
(31) Śūraḥ: Hero – “A hero is a man who is energetic in battle and skilled in handling weapons.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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