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श्री भक्ति रसामृत सिंधु
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सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस
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लहर 1: विभाव (आनंदवर्धक अवस्थाएँ)
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श्लोक 120
श्लोक
2.1.120
(२८) समः —
राग-द्वेष-विमुक्तो यः समः स कथितो बुधैः ॥२.१.१२०॥॥
अनुवाद
(28) समाः निष्पक्ष - "विद्वान कहते हैं कि जो व्यक्ति राग-द्वेष से मुक्त है, उसे निष्पक्ष कहा जाता है।"
(28) Samah Nishpakshya - "The learned say that a person who is free from likes and dislikes is called impartial."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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