श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस  »  लहर 1: विभाव (आनंदवर्धक अवस्थाएँ)  »  श्लोक 114
 
 
श्लोक  2.1.114 
(२६) गम्भीरः —
दुर्विबोधाशयो यस् तु स गम्भीरः इतीर्यते ॥२.१.११४॥॥
 
 
अनुवाद
(26) गम्भीरः: अज्ञेय - "जिस व्यक्ति के इरादे समझना कठिन हो, उसे अज्ञेय कहते हैं।"
 
(26) Gambhirah: Agyeya - "A person whose intentions are difficult to understand is called Agyeya."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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