श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस  »  लहर 1: विभाव (आनंदवर्धक अवस्थाएँ)  »  श्लोक 111
 
 
श्लोक  2.1.111 
(२५) क्षमाशीलः —
क्षमाशीलो’पराधानां सहनः परिकीर्त्यते ॥२.१.१११॥॥
 
 
अनुवाद
(25) क्षमाशीलः सहनशील - "जो व्यक्ति दूसरों के अपराध सहन करता है, उसे सहनशील कहा जाता है।"
 
(25) Forbearance: Forbearing - "A person who tolerates the offenses of others is called forbearing."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)