श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस  »  लहर 1: विभाव (आनंदवर्धक अवस्थाएँ)  »  श्लोक 100
 
 
श्लोक  2.1.100 
(२०) शास्त्र-चक्षुः —
शास्त्रानुसारि-कर्मा यः शास्त्र-चक्षुः स कथ्यते ॥२.१.१००॥॥
 
 
अनुवाद
(20) शास्त्र-चक्षुः: शास्त्रों की आँखों से देखता है - "जो व्यक्ति शास्त्रों की आँखों से देखता है, वह व्यक्ति शास्त्र के नियमों के अनुसार अपने कर्म करता है।"
 
(20) Shastra-chakshuḥ: Sees with the eyes of the scriptures – “The person who sees with the eyes of the scriptures, does his work according to the rules of the scriptures.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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