श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 1: पूर्वी विभाग: भक्ति के विभिन्न प्रकार  »  लहर 4: प्रेम-भक्ति (भगवान के प्रेम में भक्ति)  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.4.20 
श्रीमत्-प्रभुपदाम्भोजैः सर्वा भागवतामृते ।
व्यक्तीकृतास्ति गूढापि भक्ति-सिद्धान्त-माधुरी ॥१.४.२०॥
 
 
अनुवाद
“मेरे गुरु श्री सनातन गोस्वामी ने अपने बृहद्भागवतामृत में भक्ति के निष्कर्षों की मधुरता का बहुत स्पष्ट रूप से वर्णन किया है, यद्यपि यह बहुत गूढ़ है।”
 
“My guru Sri Sanatana Goswami has described the sweetness of the conclusions of devotion in his Brihad Bhagavatamrita very clearly, although it is very profound.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)