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श्री भक्ति रसामृत सिंधु
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श्लोक 36
श्लोक
1.3.36
अथ समुत्कण्ठा —
समुत्कण्ठा निजाभीष्ट-लाभाय गुरु-लुब्धता ॥१.३.३६॥
अनुवाद
"लालसा को अब परिभाषित किया गया है: लालसा का अर्थ है प्रभु की सेवा प्राप्त करने के लिए तीव्र लालच रखना।"
"Craving is now defined: Craving means having a strong desire to obtain the service of the Lord."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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