vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री भक्ति रसामृत सिंधु
»
सागर 1: पूर्वी विभाग: भक्ति के विभिन्न प्रकार
»
लहर 3: भाव-भक्ति (उत्कट समाधि में भक्ति)
»
श्लोक 22
श्लोक
1.3.22
नारदस्य प्रसादेन प्रह्लादे शुध-वासना ।
निसर्गः सैव तेनात्र रतिर् नैसर्गिकी मता ॥१.३.२२ ॥
अनुवाद
"नारद ने प्रह्लाद पर कृपा या निसर्ग किया और इससे उनमें भक्ति भावनाएँ उत्पन्न हुईं। इसलिए उनकी रति को नैसर्गिकी (दया द्वारा) कहा जाता है।"
"Narada showered Prahlada with grace or nirgha and this aroused devotional feelings in him. Hence his love is called nirgha (by kindness)."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×