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श्री भक्ति रसामृत सिंधु
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सागर 1: पूर्वी विभाग: भक्ति के विभिन्न प्रकार
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लहर 2: साधना-भक्ति (अभ्यास में भक्ति)
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श्लोक 3
श्लोक
1.2.3
सा भक्तिः सप्तम-स्कन्धे भङ्ग्या देवर्षिणोदिता ॥१.२.३॥
अनुवाद
श्रीमद्भागवत के सातवें स्कंध में नारद जी साधना-भक्ति के साथ-साथ भक्ति प्रतीत होने वाली बातों की भी चर्चा करते हैं।
In the seventh Skandha of Shrimad Bhagwat, Narada ji discusses not only sadhana-bhakti but also the things that appear to be devotion.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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