vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री भक्ति रसामृत सिंधु
»
सागर 1: पूर्वी विभाग: भक्ति के विभिन्न प्रकार
»
लहर 2: साधना-भक्ति (अभ्यास में भक्ति)
»
श्लोक 293
श्लोक
1.2.293
वैध-भक्त्य्-अधिकारी तु भावाविर्भवनावधि ।
अत्र शास्त्रं तथा तर्कम् अनुकूलम् अपेक्षते ॥१.२.२९३ ॥
अनुवाद
“वैधी-भक्ति के लिए योग्य लोग भाव-भक्ति के प्रकट होने तक शास्त्र के नियमों और तर्क के अनुकूल उपयोग पर निर्भर रहते हैं।”
“Those qualified for Vaidhi-Bhakti depend on the rules of the scriptures and the appropriate application of logic until Bhava-Bhakti manifests.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×