श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 1: पूर्वी विभाग: भक्ति के विभिन्न प्रकार  »  लहर 2: साधना-भक्ति (अभ्यास में भक्ति)  »  श्लोक 273
 
 
श्लोक  1.2.273 
सा कामरूपा सम्बन्ध-रूपा चेति भवेद् द्विधा ॥१.२.२७३ ॥
 
 
अनुवाद
“रागात्मिका भक्ति दो प्रकार की होती है: दाम्पत्य भाव से प्रेरित (काम-रूप) और अन्य संबंधों से प्रेरित (सम्बन्ध-रूप)।”
 
“Ragatmika bhakti is of two kinds: that inspired by conjugal feelings (kama-forma) and that inspired by other relationships (sambandha-forma).”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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