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श्री भक्ति रसामृत सिंधु
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सागर 1: पूर्वी विभाग: भक्ति के विभिन्न प्रकार
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लहर 2: साधना-भक्ति (अभ्यास में भक्ति)
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श्लोक 251
श्लोक
1.2.251
किन्तु ज्ञान-विरक्त्य्-आदि-साध्यं भक्त्यैव सिध्यति ॥१.२.२५१ ॥
अनुवाद
"हालाँकि, ज्ञान, वैराग्य और अन्य प्रक्रियाओं के लक्ष्य वास्तव में केवल भक्ति द्वारा ही प्राप्त किए जाते हैं।"
"However, the goals of knowledge, detachment and other processes are actually attained only through devotion."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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