श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 1: पूर्वी विभाग: भक्ति के विभिन्न प्रकार  »  लहर 2: साधना-भक्ति (अभ्यास में भक्ति)  »  श्लोक 244
 
 
श्लोक  1.2.244 
अलौकिक-पदार्थानाम् अचिन्त्या शक्तिर् ईदृशी ।
भावं तद्-विषयं चापि या सहैव प्रकाशयेत् ॥१.२.२४४ ॥
 
 
अनुवाद
"इन पाँच असाधारण अंगों की अकल्पनीय शक्ति यह है कि वे एक ही समय में भाव की स्थिति और उसके लक्ष्य, कृष्ण को प्रकट करेंगे।"
 
"The unimaginable power of these five extraordinary limbs is that they will reveal at the same time the state of bhava and its goal, Krishna."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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