तथा च तत्रैव —
दृष्ता स्पृष्टा तथा ध्याता कीर्तिता नमिता स्तुता ।
रोपिता सेविता नित्यं पूजिता तुलसी शुभा ॥१.२.२०४ ॥
नवधा तुलसीं देवीं ये भजन्ति दिने दिने ।
युग-कोटि-सहस्राणि ते वसन्ति हरेर् गृहे ॥१.२.२०५॥
अनुवाद
स्कंद पुराण से भी: "जो लोग प्रतिदिन नौ विधियों द्वारा शुभ तुलसी की पूजा करते हैं - दर्शन, स्पर्श, ध्यान, महिमा, प्रणाम, स्तुति, रोपण, सेवा और पूजा - वे दस अरब युगों तक भगवान के घर में रहते हैं।"
Also from the Skanda Purana: "Those who worship the auspicious Tulsi daily by nine methods – sight, touch, meditation, glorification, salutation, praise, planting, service and worship – they live in the house of God for ten billion ages."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥