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श्लोक 188
श्लोक
1.2.188
अथ सख्यम् —
विश्वासो मित्र-वृत्तिश् च सख्यं द्विविधम् ईरितम् ॥१.२.१८८॥
अनुवाद
“मित्रता: सख्यम दो प्रकार के होते हैं: विश्वास और मित्रता।”
“Friendship: Sakhyam is of two kinds: trust and friendship.”
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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