श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 1: पूर्वी विभाग: भक्ति के विभिन्न प्रकार  »  लहर 2: साधना-भक्ति (अभ्यास में भक्ति)  »  श्लोक 188
 
 
श्लोक  1.2.188 
अथ सख्यम् —
विश्वासो मित्र-वृत्तिश् च सख्यं द्विविधम् ईरितम् ॥१.२.१८८॥
 
 
अनुवाद
“मित्रता: सख्यम दो प्रकार के होते हैं: विश्वास और मित्रता।”
 
“Friendship: Sakhyam is of two kinds: trust and friendship.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)