| श्री भक्ति रसामृत सिंधु » सागर 1: पूर्वी विभाग: भक्ति के विभिन्न प्रकार » लहर 2: साधना-भक्ति (अभ्यास में भक्ति) » श्लोक 181 |
|
| | | | श्लोक 1.2.181  | क्रीदा-ध्यानं, यथा पद्मे —
सर्व-माधुर्य-साराणि सर्वाद्भुतमयानि च ।
ध्यायन् हरेश् चरित्राणि ललितानि विमुच्यते ॥१.२.१८१ ॥ | | | | | | अनुवाद | | पद्म पुराण से भगवान की लीलाओं का ध्यान करते हुए: "जो भगवान की सबसे मधुर, सबसे आश्चर्यजनक, सबसे आकर्षक लीलाओं का ध्यान करता है, उसे मुक्ति मिलती है।" | | | | Meditating on the pastimes of the Lord, from the Padma Purana: "One who meditates on the sweetest, most wonderful, most attractive pastimes of the Lord attains liberation." | | ✨ ai-generated | | |
|
|