श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 1: पूर्वी विभाग: भक्ति के विभिन्न प्रकार  »  लहर 2: साधना-भक्ति (अभ्यास में भक्ति)  »  श्लोक 180
 
 
श्लोक  1.2.180 
गुण-ध्यानं, यथा विष्णुधर्मे —
ये कुर्वन्ति सदा भक्त्या गुणानुस्मरणं हरेः ।
प्रक्षीण-कलुषौघास् ते प्रविशन्ति हरेः पदम् ॥१.२.१८०॥
 
 
अनुवाद
भगवान के गुणों का ध्यान, विष्णु-धर्म से: "जो लोग भक्ति के साथ भगवान के गुणों का निरंतर ध्यान करते हैं, वे सभी कल्मषों को नष्ट करके भगवान के धाम में प्रवेश करते हैं।"
 
Meditation on the qualities of the Lord, from Vishnu-dharma: "Those who constantly meditate on the qualities of the Lord with devotion, destroy all contaminations and enter the abode of the Lord."
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas