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श्लोक 1.2.175  |
अथ स्मृतिः —
यथा कथं चिन्-मनसा सम्बन्धः स्मृतिर् उच्यते ॥१.२.१७५॥ |
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| अनुवाद |
| “स्मरण: मन को किसी न किसी तरह प्रभु से जोड़ना स्मरण कहलाता है।” |
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| “Remembrance: Connecting the mind with God in some way or the other is called remembrance.” |
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