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श्री भक्ति रसामृत सिंधु
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सागर 1: पूर्वी विभाग: भक्ति के विभिन्न प्रकार
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लहर 2: साधना-भक्ति (अभ्यास में भक्ति)
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श्लोक 175
श्लोक
1.2.175
अथ स्मृतिः —
यथा कथं चिन्-मनसा सम्बन्धः स्मृतिर् उच्यते ॥१.२.१७५॥
अनुवाद
“स्मरण: मन को किसी न किसी तरह प्रभु से जोड़ना स्मरण कहलाता है।”
“Remembrance: Connecting the mind with God in some way or the other is called remembrance.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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