श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 1: पूर्वी विभाग: भक्ति के विभिन्न प्रकार  »  लहर 2: साधना-भक्ति (अभ्यास में भक्ति)  »  श्लोक 171
 
 
श्लोक  1.2.171 
तत्र नाम-श्रवणं, यथा गारुडे —
संसार-सर्प-दष्ट-
नष्ट-चेष्टैक-भेषजम् ।
कृष्णेति वैष्णवं मन्त्रं
श्रुत्वा मुक्तो भवेन् नरः ॥१.२.१७१ ॥
 
 
अनुवाद
गरुड़ पुराण से भगवान का पवित्र नाम सुनकर: "वैष्णव मंत्र 'कृष्ण' सुनकर, जो संसार के साँप के दंश का प्रतिकार करने वाली एकमात्र प्रभावी औषधि है, मनुष्य मुक्त हो जाता है।"
 
Hearing the Holy Name of the Lord from Garuda Purana: "By hearing the Vaishnava mantra 'Krishna', which is the only effective medicine to counteract the bite of the snake of samsara, one becomes liberated."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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