श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 1: पूर्वी विभाग: भक्ति के विभिन्न प्रकार  »  लहर 2: साधना-भक्ति (अभ्यास में भक्ति)  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.2.16 
उत्तमो मध्यमश् च स्यात् कनिष्ठश् चेति स त्रिधा ॥१.२.१६॥
 
 
अनुवाद
“वैधी-साधना-भक्ति के लिए तीन प्रकार के व्यक्ति योग्य हैं: उत्तमाधिकारी, मध्यमाधिकारी और कनिष्ठाधिकारी।”
 
“Three types of people are eligible for Vaidhi-Sadhana-Bhakti: Uttamadhikari, Madhyamadhikari and Kanishthadhikari.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)