पञ्चरात्रे च —
सुरर्षे विहिता शास्त्रे हरिम् उद्दिश्य या क्रिया ।
सैव भक्तिर् इति प्रोक्ता तया भक्तिः परा भवेत् ॥१.२.१३॥
अनुवाद
नारद-पंचरात्र में कहा गया है: "हे देवर्षि, शास्त्रों में भगवान को लक्ष्य मानकर किए गए सभी कर्म वैध-भक्ति कहलाते हैं। इस भक्ति से व्यक्ति प्रेम-भक्ति प्राप्त करता है।"
In the Narada-Pancharatra it is said: "O Devarshi, in the scriptures all actions performed with the Lord as the object are called Vaidya-Bhakti. By this devotion one attains Prem-Bhakti."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥