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bhagavat 9.8.7: और्व ऋषि के निर्देशों का पालन करते हुए, सगर महाराज ने अश्वमेध यज्ञ किया और इस प्रकार भगवान को प्रसन्न किया जो परम नियंत्रक हैं, सभी विद्वानों की आत्मा हैं, और सभी वैदिक ज्ञान के जानकार हैं। किंतु स्वर्ग के राजा इंद्र ने यज्ञ में बलि चढ़ाने वाले घोड़े को चुरा लिया।   |   bhagavat अध्याय 9.8: भगवान् कपिलदेव से सगर-पुत्रों की भेंट   ।   bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 8: भगवान् कपिलदेव से सगर-पुत्रों की भेंट  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  9.8.7 
सोऽश्वमेधैरयजत सर्ववेदसुरात्मकम् ।
और्वोपदिष्टयोगेन हरिमात्मानमीश्वरम् ।
तस्योत्सृष्टं पशुं यज्ञे जहाराश्वं पुरन्दर: ॥ ७ ॥
 
 
अनुवाद
और्व ऋषि के निर्देशों का पालन करते हुए, सगर महाराज ने अश्वमेध यज्ञ किया और इस प्रकार भगवान को प्रसन्न किया जो परम नियंत्रक हैं, सभी विद्वानों की आत्मा हैं, और सभी वैदिक ज्ञान के जानकार हैं। किंतु स्वर्ग के राजा इंद्र ने यज्ञ में बलि चढ़ाने वाले घोड़े को चुरा लिया।
 
Following the orders of the sage Aurva, King Sagara performed the Ashwamedha sacrifice and thus pleased the Supreme Lord, who is the Supreme Controller, the Supreme Being of all learned men and the knower of all the Vedas. But Indra, the King of heaven, stole the horse that was to be sacrificed in the sacrifice.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)