Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 9.8.5-6: तालजंघ, यवन, शक, हैहय और बर्बर आदि जाति के असभ्य लोगों का वध करने के स्थान पर, सगर महाराज ने अपने गुरु और्व के आदेशों का पालन करते हुए उन्हें वध्य किए बिना ही अलग-अलग रूप में रहने को विवश कर दिया। उन्होंने कुछ के सिर घुटवा दिए, लेकिन उन्हें मूँछें रखने की अनुमति दी। कुछ के सिर आधे घुटवा दिए, और कुछ को उन्होंने बिना भीतरी वस्त्र के कर दिया। इस प्रकार ये विभिन्न जातियाँ भिन्न-भिन्न वस्त्र धारण करने के लिए बाध्य की गईं, लेकिन राजा सगर ने इन्हें मारकर समाप्त नहीं किया। | bhagavat अध्याय 9.8: भगवान् कपिलदेव से सगर-पुत्रों की भेंट । bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यस्तालजङ्घान् यवनाञ्छकान् हैहयबर्बरान् ।
नावधीद् गुरुवाक्येन चक्रे विकृतवेषिण: ॥ ५ ॥
मुण्डाञ्छ्मश्रुधरान् कांश्चिन्मुक्तकेशार्धमुण्डितान् ।
अनन्तर्वासस: कांश्चिदबहिर्वाससोऽपरान् ॥ ६ ॥
अनुवाद
तालजंघ, यवन, शक, हैहय और बर्बर आदि जाति के असभ्य लोगों का वध करने के स्थान पर, सगर महाराज ने अपने गुरु और्व के आदेशों का पालन करते हुए उन्हें वध्य किए बिना ही अलग-अलग रूप में रहने को विवश कर दिया। उन्होंने कुछ के सिर घुटवा दिए, लेकिन उन्हें मूँछें रखने की अनुमति दी। कुछ के सिर आधे घुटवा दिए, और कुछ को उन्होंने बिना भीतरी वस्त्र के कर दिया। इस प्रकार ये विभिन्न जातियाँ भिन्न-भिन्न वस्त्र धारण करने के लिए बाध्य की गईं, लेकिन राजा सगर ने इन्हें मारकर समाप्त नहीं किया।
Sagar Maharaj did not kill the uncivilized people of Talajangha, Yavan, Shak, Haihaya and Barbar castes as per the orders of his Guru Aurva, but forced some of them to wear ugly clothes, got the heads of some shaved but allowed them to keep moustaches, got the hair of some open, got the heads of some half shaved, made some without inner garments and made some naked. In this way these castes were forced to wear different clothes, but King Sagar did not kill them.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥