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bhagavat 9.8.30: अपने राज्य का भार अंशुमान को सौंपकर और इस प्रकार सभी भौतिक चिंताओं और बन्धनों से मुक्त होकर, सगर महाराज ने और्व मुनि द्वारा बताए गए साधनों का पालन करते हुए परम गति प्राप्त की।   |   bhagavat अध्याय 9.8: भगवान् कपिलदेव से सगर-पुत्रों की भेंट   ।   bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 8: भगवान् कपिलदेव से सगर-पुत्रों की भेंट  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  9.8.30 
राज्यमंशुमते न्यस्य नि:स्पृहो मुक्तबन्धन: ।
और्वोपदिष्टमार्गेण लेभे गतिमनुत्तमाम् ॥ ३० ॥
 
 
अनुवाद
अपने राज्य का भार अंशुमान को सौंपकर और इस प्रकार सभी भौतिक चिंताओं और बन्धनों से मुक्त होकर, सगर महाराज ने और्व मुनि द्वारा बताए गए साधनों का पालन करते हुए परम गति प्राप्त की।
 
By handing over the reins of his kingdom to Anshumaan and being free from all material worries and bondages, Sagara Maharaja attained the ultimate salvation by following the methods taught by the sage Aurva.
 
इस प्रकार श्रीमद् भागवतम के स्कन्ध नौ के अंतर्गत आठवाँ अध्याय समाप्त होता है ।
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)